भारत की सबसे बड़ी यात्री कार कंपनी मारुति सुज़ुकी अब एक नए व्यवसाय क्षेत्र में कदम रखने जा रही है। अंदरूनी दस्तावेज़ों से पता चला है कि मारुति एक गुप्त छोटी बस परियोजना पर काम कर रही है। यह कंपनी का व्यवसाय वाहन क्षेत्र में पहला बड़ा कदम हो सकता है। इससे भारत में हल्के व्यवसाय वाहन (LCVs) के बाजार में बदलाव आ सकता है।
परियोजना से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि यह बस मारुति ईको प्लेटफॉर्म पर आधारित है और इसका डिज़ाइन एक छोटी मिनी बस पर केंद्रित है। यह वाहन 9 से 12 लोगों के बैठने की क्षमता रखेगा, जो स्कूल बस, शहर के अंदर शटल सेवा और ग्रामीण परिवहन के लिए उपयुक्त होगा।
इस नई मॉडल में पुराने ईको के मुकाबले कुछ नई सुविधाएँ हो सकती हैं:
मारुति अब ऐसे खरीदारों पर ध्यान दे रही है जो बेड़े में वाहन चलाते हैं (जैसे स्कूल, संस्थान आदि)। भारत में ईंधन बचाने वाली छोटी बसों की माँग लगातार बढ़ रही है, और यह प्रोजेक्ट उसी की ओर एक कदम है।
भारत के शहरों में यात्रा करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। जैसे-जैसे शहर बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे आखिरी मील कनेक्टिविटी (लास्ट माइल कनेक्शन) की ज़रूरत भी बढ़ रही है। इसी वजह से सस्ती व्यवसाय बसों की माँग तेज़ी से बढ़ी है।
मारुति का देर से बाज़ार में आना कुछ हद तक फोर्स मोटर्स, टाटा विंगर, और महिन्द्रा सुप्रो जैसे पहले से मौजूद कंपनियों के लिए चुनौती बन सकता है।
इस बस की अनुमानित क़ीमत ₹8 से ₹10 लाख (एक्स-शोरूम) के बीच हो सकती है, जिससे यह अन्य विकल्पों के मुकाबले काफ़ी प्रतिस्पर्धी हो जाएगी।
फिलहाल इस बस की कोई आधिकारिक तस्वीर नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार इसमें चौकोर आकार, बड़ा अंदरूनी स्थान और साधारण लेकिन उपयोगी डैशबोर्ड होगा। ईको प्लेटफॉर्म की वजह से मारुति को किफ़ायती दाम, अच्छा सर्विस नेटवर्क और आसान पार्ट्स उपलब्धता का लाभ मिलेगा।
इसमें 1.2 लीटर पेट्रोल/सीएनजी इंजन हो सकता है, जो लंबे समय तक चलने और कम रखरखाव में सक्षम होगा। इसकी ताक़त ज़्यादा नहीं होगी, लेकिन यह बेड़े चलाने वालों की ज़रूरतों को पूरा करेगा।
अगर सूत्रों की बात मानी जाए, तो यह छोटी बस 2026 के मध्य तक बाज़ार में आ सकती है और 2025 के अंत तक इसकी ट्रायल उत्पादन शुरू हो सकता है। एक बार प्लेटफॉर्म को मंजूरी मिल गई, तो मारुति को मॉडल तैयार करने में ज्यादा समय नहीं लगता।
मारुति सुज़ुकी व्यवसाय वाहन बाज़ार में नया अध्याय शुरू करने जा रही है। अगर कीमत और फीचर्स सही रखें गए, तो यह छोटी माइक्रो बस स्कूलों, बेड़े खरीदारों और सरकारी टेंडर के लिए पहली पसंद बन सकती है, ख़ासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में।
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