भारत सरकार ने पीएम ई-ड्राइव योजना को मार्च 2028 तक बढ़ा दिया है। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों को अब और लंबा सरकारी समर्थन मिलेगा। लेकिन, सरकार ने यह भी तय किया है कि इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर (ई-3डब्ल्यू) को मार्च 2026 के बाद कोई सब्सिडी नहीं मिलेगी। यह फैसला इस क्षेत्र की दिशा को बदल देगा।
पुरानी फेम योजना की जगह आई यह नई योजना अब इलेक्ट्रिक बसों, दो-पहिया और छोटे व्यवसाय वाहनों पर ज़्यादा ध्यान देती है। इन क्षेत्रों को अब भी सरकार से मदद मिलेगी, लेकिन ई-3डब्ल्यू को 2026 के बाद कोई प्रोत्साहन नहीं मिलेगा। इसका मतलब है कि यह क्षेत्र अब आत्मनिर्भर बन चुका है।
इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर बहुत तेज़ी से बढ़े हैं। इन्हें चलाना सस्ता है, रख-रखाव आसान है और ये छोटी दूरी और सामान ढोने के लिए बहुत इस्तेमाल होते हैं। सरकार का मानना है कि अब ये बिना सहायता के भी बाज़ार में टिक सकते हैं। यह फैसला अचानक नहीं है—उद्योग के पास बदलाव के लिए 2 साल हैं।
सरकार ने वित्त वर्ष 2025 के लिए ₹500 करोड़ का बजट तय किया है। यह राशि इलेक्ट्रिक दो-पहिया और तीन-पहिया दोनों के लिए सब्सिडी में इस्तेमाल होगी। लेकिन 2026 के बाद केवल बसों और माल ढोने वाले व्यवसाय ईवी को ही सहायता मिलेगी।
सरकार अब उन क्षेत्रों में पैसा लगाना चाहती है जहां असर ज़्यादा हो। जैसे कि सार्वजनिक परिवहन और माल ढोने वाले वाहन, जो अधिक प्रदूषण करते हैं। इन्हें इलेक्ट्रिक बनाकर प्रदूषण को जल्दी घटाया जा सकता है।
कुछ कंपनियां इस योजना के विस्तार से खुश हैं क्योंकि इससे उन्हें योजना बनाने में मदद मिलेगी। लेकिन थ्री-व्हीलर बनाने वाली कंपनियां चिंतित हैं, खासकर छोटे शहरों में, जहां कीमत अब भी एक बड़ी रुकावट है। कई ग्राहक इलेक्ट्रिक वाहन सिर्फ इसलिए ले पाते हैं क्योंकि उन्हें सब्सिडी मिलती है।
फिर भी ज़्यादातर लोग मानते हैं कि सब्सिडी हमेशा नहीं चल सकती। जब तारीख साफ़ हो, तो व्यवसाय पहले से तैयारी कर सकते हैं। इससे बदलाव धीरे-धीरे और आसान होता है।
अब भारत इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने की दिशा में बाज़ार आधारित मॉडल पर बढ़ रहा है। पीएम ई-ड्राइव का विस्तार इसी सोच का हिस्सा है। जब सब्सिडी खत्म होगी, तो कुछ और उपाय इसकी जगह लेंगे, जैसे—
सरकार चाहती है कि स्वच्छ परिवहन केवल पैसे के दम पर न बढ़े, बल्कि समझदारी से बनी नीतियों और असली ज़रूरत के हिसाब से आगे बढ़े।
पीएम ई-ड्राइव योजना का विस्तार दिखाता है कि सरकार अब भी इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर गंभीर है। ई-3डब्ल्यू की सब्सिडी खत्म करना यह भरोसा दिखाता है कि यह क्षेत्र अब मज़बूत हो चुका है। अब फोकस उन व्यवसाय वर्गों पर है जिन्हें और समर्थन चाहिए। इलेक्ट्रिक वाहन की कहानी जारी है—लेकिन अब एक नए अध्याय में।
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