सॉलिड-स्टेट बैटरी से भारत में व्यवसाय ईवी बदलाव को मिलेगी रफ्तार

अपडेट किया गया : 12-Aug-2025, 05:55:08 pm

सॉलिड-स्टेट बैटरी से भारत में व्यवसाय ईवी बदलाव को मिलेगी रफ्तार

Solid-state batteries offer longer range, faster charging, and safer commercial EVs. Boosting India’s electric mobility future.

समीक्षा

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PV

By Pratham

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भारत का व्यवसाय इलेक्ट्रिक वाहन बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक तीन-पहिया वाहन शहर की ट्रैफिक में चलते नज़र आते हैं। ई-रिक्शा चौराहों पर इंतज़ार करते दिखते हैं। इलेक्ट्रिक बसें शहर के अंदर और शहरों के बीच चल रही हैं। चार्जिंग स्टेशन दिखाई तो देने लगे हैं, लेकिन अभी पर्याप्त जगहों पर नहीं हैं।

इस बदलाव को बढ़ावा दे रहे हैं बढ़ते ईंधन दाम और कड़े प्रदूषण नियम। सरकार की ओर से प्रोत्साहन भी मिल रहा है। पिछले 10 सालों में लिथियम-आयन बैटरी की कीमत में तेज़ गिरावट आई है। फिर भी बेड़े (फ्लीट) चलाने वालों को दिक्कत होती है—दूरी (रेंज) कम है, चार्जिंग धीमी है और सुरक्षा को लेकर चिंता रहती है।

बैटरी की किस्में अपनाने में अड़चन

व्यवसाय ईवी में ज़्यादातर दो तरह की बैटरी लगती हैं।

  • निकेल मैंगनीज़ कोबाल्ट (एनएमसी) बैटरियां ज़्यादा ऊर्जा स्टोर करती हैं, लेकिन जल्दी गरम हो जाती हैं। आग लगने के मामले में कई कंपनियों को अपने वाहन वापस मंगवाने पड़े।
  • लिथियम फेरो फॉस्फेट (एलएफपी) बैटरियां सुरक्षित होती हैं, लेकिन भारी होती हैं। ज़्यादा वज़न से दूरी और प्रदर्शन कम हो जाता है।

ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) भी बड़ी रुकावट है। भारत में केवल लगभग 12,000 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन हैं। इतने बड़े देश के लिए यह बहुत कम है। कम चार्जिंग सुविधाओं से लोगों को दूरी पूरी न कर पाने का डर (रेंज एंग्ज़ायटी) रहता है। यह डर अपनाने की रफ्तार धीमी करता है और निवेश भी घटाता है।

सॉलिड-स्टेट बैटरियां कैसे बदलेंगी खेल

सॉलिड-स्टेट बैटरियों (एसएसबी) में तरल की जगह ठोस इलेक्ट्रोलाइट होता है। यह ज़्यादा असरदार और सुरक्षित है।

  • ज़्यादा ऊर्जा क्षमता: मौजूदा लिथियम-आयन बैटरियां 250 से 300 Wh/kg होती हैं। सॉलिड-स्टेट बैटरियां 400 से 500 Wh/kg या उससे भी अधिक होती हैं। यानी कोई डिलीवरी वाहन जो आज 100 किलोमीटर चलता है, वही बिना वज़न बढ़ाए 150 से 200 किलोमीटर चल सकता है।
  • तेज़ चार्जिंग: कुछ नमूनों ने 15 मिनट में 80% चार्जिंग हासिल की है। इसका मतलब—ज़्यादा चक्कर, ज़्यादा कमाई, और कम खाली समय।
  • बेहतर सुरक्षा: ठोस इलेक्ट्रोलाइट तरल की तरह नहीं जलता। टूटने पर भी बैटरी को आग पकड़ने का समय नहीं मिलता।
  • लंबी उम्र: ये बैटरियां हज़ारों बार चार्ज होने पर भी क्षमता में बहुत कम गिरावट दिखाती हैं। इससे बैटरी बदलने का खर्च घटता है।
  • पर्यावरण के अनुकूल: इनमें कम जहरीले रसायन होते हैं और इन्हें ज़्यादा रिसाइकल किया जा सकता है। यह भारत के हरित लक्ष्यों से मेल खाता है।

व्यवसाय उपयोग की ओर बढ़ता कदम

इनका निर्माण कठिन है। इसमें तेज़ तापमान और ऊँचा दबाव लगता है, जो महंगा है। अभी सॉलिड-स्टेट बैटरियां लिथियम-आयन से महंगी हैं।
फिर भी विदेशी निवेश लगातार बढ़ रहा है। विदेशी बाज़ार 2025 में 380 मिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2032 में 6.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक होने का अनुमान है।

निष्कर्ष: भारत के लिए रणनीतिक मौका

भारत में किफ़ायत की ज़रूरत, बढ़ती ईवी मांग और ढांचे की समस्याएं—ये तीनों मिलकर सॉलिड-स्टेट बैटरी लागू करने के लिए सही माहौल बनाती हैं।
इस मौके को पाने के लिए भारत को उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं में सॉलिड-स्टेट बैटरी शोध को शामिल करना चाहिए। आपूर्ति श्रृंखला मज़बूत होनी चाहिए। बिजली ग्रिड को तेज़ चार्जिंग संभालने लायक बनाना होगा। ईवी सुरक्षा पर जनता का भरोसा बढ़ाना होगा।

सॉलिड-स्टेट बैटरियां सिर्फ सुधार नहीं हैं—ये आम जनता के लिए ईवी को मानक बना सकती हैं। इससे सार्वजनिक परिवहन, माल ढुलाई और आखिरी चरण की डिलीवरी में बड़ा बदलाव आएगा।

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