भारतीय परिवहन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण प्रतिष्ठान (आईएफ़टीआरटी) की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2025 की पहली छमाही में देश के प्रमुख मालवाहक मार्गों पर ट्रक किराया 3–4% तक गिर गया। यह गिरावट व्यवसाय ट्रकों की मांग में कमी और बारिश से प्रभावित माल ढुलाई के कारण आई है।
कई प्रमुख मार्गों पर ट्रक किराये में कमी दर्ज की गई, जैसे:
इन सभी मार्गों पर ट्रक किराया 3–4% तक घटा है। ये सभी मार्ग देश की माल परिवहन व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। यहां गिरावट का मतलब है कि व्यवसाय वाहन की मांग में पूरे देश में कमी आई है।
इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण ये हैं:
कम किराये का सबसे बड़ा असर छोटे ट्रक मालिकों पर होता है। ये मालिक ज्यादातर मौके के ऑर्डर पर काम करते हैं। जब कमाई घटती है तो:
इसका असर केवल ढुलाई करने वाली कंपनियों पर ही नहीं, बल्कि व्यवसाय ट्रक बनाने वाली कंपनियों और उन्हें ऋण देने वाले संस्थानों पर भी पड़ता है।
आईएफ़टीआरटी का मानना है कि जब बारिश कम होगी और त्योहारों का सीजन शुरू होगा, तब ट्रकों की मांग बढ़ेगी और किराया फिर ऊपर आ सकता है। ये कारण मदद कर सकते हैं:
अगर ये सभी गतिविधियाँ ठीक से शुरू होती हैं, तो भारत में ट्रक किराया फिर से बढ़ सकता है। पर तब तक, ट्रक मालिकों को अपने खर्च और कमाई में संतुलन बनाकर चलना होगा।
| जानकारी | विवरण |
| किराये में गिरावट | प्रमुख मार्गों पर 3–4% तक |
| प्रमुख कारण | एमएसएमई की कम मांग, बरसात का असर |
| प्रभावित मार्ग | दिल्ली–मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, कोलकाता |
| असर | कम कमाई, व्यवसाय ट्रक की खरीद में देरी |
| सुधार की संभावना | बरसात के बाद और त्योहारों से पहले |
भारत की व्यवसाय ट्रक प्रणाली देश की आर्थिक गतिविधियों से बहुत गहराई से जुड़ी हुई है। जब भी कारोबार धीमा होता है या मौसम बाधा डालता है, तो उसका सीधा असर ट्रक चालकों, ट्रांसपोर्ट कंपनियों और वाहन निर्माताओं पर पड़ता है। इसलिए, सभी को इन परिवर्तनों पर नज़र रखनी चाहिए और योजना उसी के अनुसार बनानी चाहिए।
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